Saturday, 5 July 2014

संस्कृताभ्यास:

ॐ।। ॐ।। ॐ।।
अहं पृच्छामि ।
अहम् एकं प्रश्नं पृच्छामि ।
अहं भवत: नाम पृच्छामि ।
अहंपश्यामि।
अहं चित्रं पश्यामि।
अहं सुन्दरं चित्रं पश्यामि।
अहं गच्छामि ।
अहं पुस्तकालयं गच्छामि।
अहं प्रातःकाले मन्दिरं गच्छामि।
अहं हसामि ।
अहं प्रतिदिनं हसामि ।
अहं प्रतिदिनं हसामि। शतरञ्जक्रीडां च क्रीडामि।
इदानीम् भवान् लिखतु । ----- इस प्रकार आप लिखिए ......
संस्कृत के दो शब्दो के वाक्य लिखना , पढ़ना , बोलना नित्य दिन चर्या मे शुरू करो आज से, अभी से ।
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ॐ शांति ।। जयतु हिन्दी ।। जयतु संस्कृतम् ।। 

संस्कृताभ्यासः

ॐ ॥ संस्कृताभ्यासः
मम — मेरा , भवतः / भवत्याः — आपका
———————
मम गृहम् । भवतः गृहम् । भवत्याः गृहम् ।
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एतेन क्रमेण अधः सूचितानां शब्दानाम् उपयोगं कृत्वा वाक्यानि रचयन्तु ।
ग्रामः , देशः , राज्यम्
कुञ्चिका ( key) , स्यूतः ( bag) , कथा , पत्रिका , धनम्
आसन्दः ( chair ), भगिनी ( sister)
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यथा ( जैसे )
१).
मम ग्रामः अत्र अस्ति । -- मेरा गाँव यहाँ है ।
भवतः ग्रामः कुत्र अस्ति ? -- आपका गाँव कहाँ है ?
भवत्याः ग्रामः तत्र अस्ति । -- आपका गाँव वहाँ है ।
२).
भारत: मम देशः अस्ति । -- भारत मेरा देश है ।
भवतः देशः नाम किम् अस्ति ? -- आपके देश का नाम क्या है ?
भवत्याः देशः नाम किम् अस्ति ? -- आपके देश का नाम क्या है ?
३).
गुजरात: मम राज्यम् अस्ति । -- गुजरात मेरा राज्य है ।
भवतः राज्यम् किम् अस्ति ? -- आपका राज्य कौन सा है ?
भवत्याः राज्यम् किम् अस्ति ? -- आपका राज्य कौन सा है ?
४).
मम कुञ्चिका हरितवर्ण: अस्ति । -- मेरी कुञ्चिका हरे रंग कि है ।
भवतः कुञ्चिका नीलवर्ण: अस्ति । -- आपकी कुञ्चिका नीले रंग कि है ।
भवत्याः कुञ्चिका श्वेतवर्ण: अस्ति । -- आपकी कुञ्चिका सफ़ेद रंग कि है ।
इदानीम् भवान् लिखतु । ----- इस प्रकार आप लिखिए ......
संस्कृत के दो शब्दो के वाक्य लिखना , पढ़ना , बोलना नित्य दिन चर्या मे शुरू करो आज से, अभी से ।
ॐ शांति ।। जयतु हिन्दी ।। जयतु संस्कृतम् ।।

Thursday, 6 June 2013

आओ जाने संस्कृत

नमस्ते ये मेरा पहेला पोस्ट है जिसमे मै आप से संस्कृत के बारे मे कुछ चर्चा करुगा संस्कृत के बारे मे और उसको सीखने के लिए ब्लॉग को पड़ते रहे धन्यबाद .

संस्कृत शब्द का अर्थ होता है " जो पूर्ण हो " या " जो आदर्श हो " हमारी संस्कृत भाषा एक आदर्श व अपने मे पूर्ण भाषा है . यह दुनिया की सबसे पुरानी भाषा है जिसका प्रयोग आर्य लोग किया करते थे पर अब आज के दौर मे इस भाषा का चलन कब सा हो गया है अत: मेरा इस ब्लॉग के द्वारा ये प्रयास है की सब लोग संस्कृत को  जाने और इसका प्रयोग करे क्यों की ये दुनिया की सर्वश्रेठ भाषा है

धन्यबाद आप सभी का ...